8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों की चमकेगी किस्मत! 3.25 फिटमेंट फैक्टर के साथ इन 5 बड़ी मांगों पर टिकी नजरें

केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में दिल्ली में हुई नेशनल काउंसिल जेसीएम की बैठक में कर्मचारी संगठनों ने अपनी कई अहम मांगों को सामने रखा है। बढ़ती महंगाई और बदलती आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए वेतन संरचना, पेंशन और भत्तों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक फैसला नहीं आया है, लेकिन कर्मचारियों की अपेक्षाएं साफ नजर आ रही हैं।

फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की सबसे बड़ी मांग

इस बार सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर हो रही है। कर्मचारी संगठनों का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर करीब 3.35 किया जाए ताकि बेसिक सैलरी में बड़ा बदलाव देखने को मिले। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो लाखों कर्मचारियों की मासिक आय में सीधा असर पड़ सकता है और वेतन ढांचे में बड़ा सुधार संभव माना जा रहा है।

सालाना इंक्रीमेंट बढ़ाने पर जोर

बैठक में यह भी बात उठ सकती है कि कर्मचारियों के वार्षिक वेतन वृद्धि प्रतिशत को मौजूदा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत तक किया जाए। संगठनों का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच मौजूदा इंक्रीमेंट दर पर्याप्त नहीं है और इसे समय के अनुसार संशोधित करना जरूरी हो गया है ताकि कर्मचारियों की आय में वास्तविक वृद्धि दिखाई दे।

फैमिली यूनिट में बदलाव की मांग

एक और अहम मुद्दा फैमिली यूनिट को लेकर सामने आया है। वर्तमान में वेतन गणना में परिवार का मानक तीन सदस्यों पर आधारित माना जाता है, जिसे बढ़ाकर पांच करने का सुझाव दिया गया है। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि परिवार के खर्च बढ़ चुके हैं और इस बदलाव से वेतन में लगभग 60 प्रतिशत तक सुधार संभव हो सकता है, जिससे आर्थिक दबाव कम होगा।

पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग

डिफेंस सहित कई विभागों के कर्मचारियों ने नई पेंशन प्रणाली की जगह पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू करने की बात कही है। उनका कहना है कि पुरानी व्यवस्था से सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा अधिक मजबूत रहती थी, इसलिए इस मुद्दे को भी आयोग की चर्चाओं में शामिल किया जा सकता है।

लीव एनकैशमेंट और मेडिकल सुविधा में सुधार की उम्मीद

कर्मचारी संगठनों ने रिटायरमेंट के समय मिलने वाले लीव एनकैशमेंट की सीमा को 300 दिन से बढ़ाकर 400 दिन करने की मांग भी रखी है। साथ ही जिन कर्मचारियों को सीजीएचएस सुविधा उपलब्ध नहीं है, उनके लिए फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस में बड़ी बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है ताकि स्वास्थ्य खर्च का बोझ कम किया जा सके।

प्रमोशन और अन्य सुविधाओं पर भी चर्चा संभव

बैठक में यह प्रस्ताव भी रखा जा सकता है कि कर्मचारियों को 30 साल की सेवा अवधि में कम से कम पांच निश्चित प्रमोशन मिलें। इसके अलावा लीव ट्रैवल कंसेशन को नकद रूप में देने की सुविधा पर भी विचार करने की बात कही जा रही है। फिलहाल ये सभी मांगें चर्चा के स्तर पर हैं और अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा।

Leave a Comment